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सनातन संस्कृति की पूजा पद्धति का वैज्ञानिक प्रतिपादन

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  विज्ञान VS संस्कृति पद्धति और माध्यम -   हर संस्कृति की पूजा पद्धति और प्रक्रिया होती है जिसके माध्यम से भक्त अपने आराध्य ,भगवन के प्रति   अपनी सच्ची श्रधा आस्था और निष्ठा प्रकट करते है | सनातन संस्कृति की पूजा प्रणाली में   उपयुक्त होने वाली पद्धति का वैज्ञानिक महत्त्व निम्नलिखित है – शंख – शंख का उपयोग करने से उसके ध्वनि के माध्यम से   स्नायु   तंत्र जागृत होते है अर्थात दिमाग की तंत्रिकाए सक्रिय होती है | तिलक – रोजाना चन्दन का उपयोग करके तिलक लगाने से आज्ञाचक्र जागृत होता है जिससे लोगों में एकाग्रता और आत्मविश्वास जागृत होता हैं और बढ़ता है | कलावा – विज्ञान के अनुसार हाथ में कलावा बंधने से निर्भयता आती है और रक्त संचार संतुलित रखता है | घंटी– इसका उपयोग करने से ध्वनी का वयापक प्रभाव पढ़ता है और मन मस्तिक में चल रही बातों को आसानी से भूल जाते है और हमारा मन शांत रहता है तथा भगवन में लीन हो जाता है और एकाग्रता बनी रहती हैं | दीपक – दीपक को सकारात्मकता का प्रतिक मानते हुए कहा गया हैं की इसका उपयोग करने से सकारात्मक ऊर्जा में वृद्धि होती है |...

G20 महत्वपूर्ण जानकारी

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G20 महत्वपूर्ण जानकारी G- 20 Country List  Of The G20 countries in Hindi: 1. अर्जेंटीन (Argentina) 2. ऑस्ट्रेलिया (Australia) 3. ब्राज़िल (Brazil) 4. कनाडा (Canada) 5. चीन (China) 6. फ़्रांस (France) 7. जर्मनी (Germany) 8. इंडिया (India) 9. इंडोनेशिया (Indonesia) 10. इटली (Italy) 11. जापान (Japan) 12. मेक्सिको (Mexico) 13. रूस (Russia) 14. सऊदी अरबिया (Saudi Arabia) 15. दक्षिण कोरिया (South Korea) 16. तुर्की (Turkey) 17. यूनाइटेड किंगडम (United Kingdom) 18. संयुक्त राज्य अमेरिका (United States) 19. दक्षिण अफ्रीका (South Africa) 20. यूरोपीय संघ (European Union) G20 Country With capital 1. अर्जेंटीन - ब्यूनस आयरेस (Buenos Aires) 2. ऑस्ट्रेलिया - कैनबरा (Canberra) 3. ब्राज़िल - ब्रासिलिया (Brasília) 4. कनाडा - ऑटावा (Ottawa) 5. चीन - बीजिंग (Beijing) 6. फ़्रांस - पैरिस (Paris) 7. जर्मनी - बर्लिन (Berlin) 8. इंडिया - न्यू डिल्ही (New Delhi) 9. इंडोनेशिया - जकार्ता (Jakarta) 10. इटली - रोम (Rome) 11. जापान - टोक्यो (Tokyo) 12. मेक्सिको - मेक्सिको सिटी (Mexico City) 13. रूस - मॉस्को (Mos...

राशि के अनुसार शिव मंत्र

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                शिव मंत्र 1. मेष - ॐ नमः शिवाय ।। 2. वृष - ॐ नागेश्वराय नमः ।। 3. मिथुन - ॐ नमः शिवाय कालं महाकाल      कालं कृपालं ॐ नमः ।। 4. कर्क - ॐ चंद्रमौलेश्वर नमः ।। 5. सिंह - ॐ नमः शिवाय कालं महाकाल कालं कृपालं ॐ नमः ।। 6. कन्या - ॐ नमो शिवाय कालं ॐ नमः || 7. वृश्चिक - ॐ हौम ॐ जूं सः ।। 8. तुला - ऊं श्रीनीलकंठाय नमः ।। 9. धनु - ॐ नमो शिवाय गुरु देवाय नमः ।। 10. मकर - ॐ हौम ॐ जूं सः ।। 11. कुंभ - ऊं इन्द्रमुखाय नमः ।। 12. मीन - ॐ नमो शिवाय गुरु देवाय नमः ।।

ज्योतिर्लिंग राशि विशेष

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ज्योतिर्लिंग राशि विशेष 1. मेष - सोमनाथ  2. वृषभ - मल्लिकार्जुन 3. मिथुन - महाकालेश्वर 4. कर्क-   ओंकारेश्वर 5. सिंह - बैद्यनाथ 6. कन्या - भीमाशंकर 7. तुला-  रामेश्वरम  8. वृश्चिक - नागेश्वर  9 . धनु - काशी विश्वनाथ 10. मकर - त्रयंबकेश्वर

महाभारत से सीख

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महाभारत से सीख ✖ 1. युधिष्ठिर - युधिष्ठिर की तरह जुआ मत खेलो 2. कर्ण - कर्ण की तरह दुष्ट का एहसान मत लो 3. धृतराष्ट्र- धृतराष्ट्र की तरह पुत्र मुंह में मत कसूर | 4. कुन्ती- कुन्ती की तरह अनुचित प्रयोग मत करो | 5. द्रो पदी - द्रौपदी की तरह अनुचित जगह मत हंसो | 6. पांडू - पांडू की तरह काम के वसी भूत मत बनो | 7. दुर्योधन - दुर्योधन की तरह अनाधिकार हट मत पालो | 8. भीष्म- भीष्म की तरह अनुचित प्रतिज्ञा में मत बधो हो | 9. दुशासन - दुशासन की तरह नारी का अपमान मत करो | 10. अश्वत्थामा - अश्वत्थामा की तरह अनियंत्रित मत हो | 11. शकुनि - शकुनि की तरह कुटिलता मत अपनाओ | 12. शांतनु - शांतनु की तरह काम में आसक्त मत हो जा | 13. गांधारी- गांधारी की तरह नेत्रहीन का अनुसरण मत करो | 14. परीक्षित - परीक्षित की तरह क्रोध में अनुचित कार्य मत करो | 15. द्रोणाचार्य - द्रोणाचार्य की तरह अर्ध सत्य पर विश्वास मत करो | 16 . शाल्य- शाल्य जैसे हाथ उत्साहित करने वालों की संगति में मत रहो | ✅ 1.     अभिमन्यु  - अभिमन्यु की तरह वीर बनो | 2. कृष्णा - कृष्णा की तरह धर्म का साथ दो ...

जैसलमेर city राजस्थान

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जैसलमेर जयपुर ( राज्स्तान ) भारत का सुनहरा शहर जैसलमेर- जैसलमेर   अपने किले, हवेलियों, जीवंत बाजारों के लिए जाना जाता है। यह मध्यकालीन व्यापारिक केंद्र और पश्चिमी भारतीय राज्य राजस्थान में थार रेगिस्तान के मध्य में एक रियासत है।   यदि भूविज्ञान में आपकी रुचि है, तो जैसलमेर वह जगह है जहां आपको यात्रा करने की आवश्यकता है।   वुड फॉसिल पार्क या आकल शहर से लगभग 15 किलोमीटर दूर स्थित है।   यहां, कोई 180 मिलियन वर्ष पहले थार रेगिस्तान में हुई भूगर्भिक त्रासदियों की खोज और पता लगा सकता है।    जैसलमेर शहर -  जैसलमेर शहर पश्चिमी राजस्थान (और भारत की) सीमा के रक्षक के रूप में भी कार्य करता है।  यह 'गोल्डन सिटी' पाकिस्तान सीमा के करीब और थार रेगिस्तान के करीब स्थित है।    शहर का सबसे प्रमुख स्थल - जैसलमेर किला है, जिसे सोनार किला (स्वर्ण किला) भी कहा जाता है।  जैसलमेर किला  जयपुर ( राज्स्तान )  जैसलमेर किला -   भारत के अधिकांश अन्य किलों के विपरीत, जैसलमेर किला सिर्फ एक पर्यटक आक।  इसमें दुकानें, होटल और प्र...

कविता G20

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                        कविता नव युग का  यह संविधान ।  ईसी पर  हैं सम पूर्ण दारोमदार ।।  इसी  से होगा युग निर्माण।  इसी  से है  यह क्रांतिकारी आस।।  नव युग का  यह संविधान। वसुधैव है इसकी खास ।। पूरे विश्व की एक मात्र आस ।  उपासना से है आस। साधना में है विश्वासl।   आराधना से है आधार। विश्व की अब यही पुकार।।  नव युग का है संविधान। इसी पर है अब विश्व की आस।।  नव युग का यह संविधान । विचार क्रांति का है यह सूत्रधार।। नव युग का यह संविधान। इसी से होगा युग निर्माण।।  यही है अब जीवन आधर।  विचारों का हो परिष्कार ।। नव युग का यह संविधान। इसी से होगा युग निर्माण।।  नव युग का यह संविधान।। इसी से है अब एक मात्र आस। धरती का हो पुनरुत्थान।। मनुष्य को है विवेक की आस । बुद्धि का हो परिष्कार ।। ईसी से होगा  अब युग निर्माण। यही है विश्व का संपूर्ण आधार।।  नव युग का यह संविधान। लेकर वसुधैव कुटुंबकम हो विश्वा पास।। यही है अब विश्वास कि आस।  नव य...

कुलगीत में छुपा देख संस्कृत विश्वविद्यालय का संपूर्ण रहस्य

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॥ कुलगीत ॥ मानवी उत्थान का जो अनवरत आधार है।  देव संस्कृति विश्वविद्यालय सृजन का द्वार है ।। गोद गंगा की, हिमालय की मिली छाया इसे,   दिव्य वातावरण में पोषित मिली काया इसे ।।  कुलपिता का बरसता स्नेह संरक्षण यहाँ ।  कर्म की मिलती उन्हीं से प्रेरणा हर क्षण यहाँ ।। कुल जननी की दिव्य मृदु ममतामयी रसधार है । देव संस्कृति विश्वविद्यालय, सृजन का द्वार है ।। १।। यह प्रखर युव-शक्ति के मार्गान्तरण का हेतु है।  सभ्यता-संस्कृति - समन्वय का सुमंगल सेतु है ।।  संतुलन होता यहाँ यूँ आचरण सुविचार में, ताकि वह तृण-सा न बह पाए समय की धार में  ।। प्राणबल का इस तरह होता यहाँ संचार है।  देव संस्कृति विश्वविद्यालय, सृजन का द्वार है ।। २।। है यहाँ होता प्रखरतम चेतना का जागरण,  आपसी सदभावना, संवेदना का जागरण ।।  यह महामानव बनाने की सुगढ़ टकसाल है,  वास कर इसमें युवाओं की बदलती चाल है।।   विश्व फिर लगता उन्हें अपना सगा परिवार है । देव संस्कृति विश्वविद्यालय, सृजन का द्वार है ॥ ३॥ DEV SANSKRITI VISHWAVIDYALAYA www.de.de.in

बिलेश्वर महादेव मंदिर हरिद्वार (उत्तराखंड)

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               बिल्केश्वर महादेव मंदिर हरिद्वार (उत्तराखंड) बिल्केश्वर महादेव मंदिर हरिद्वार- हरिद्वार के पास बिल्व पर्वत पर एक स्थान है जहां माता पार्वती ने कठोर तपस्या के बाद कैलाशवासी भगवान शिव को पति रूप में पाया था। बिल्केश्वर महादेव मंदिर भगवान शिव और उनकी पत्नी कोसमर्पित है। स्थान  - यह मंदिर हरिद्वार रेलवे स्टेशन के बहुत करीब   मंदिर का इतिहास और मान्यता- बिल्केश्वर महादेव मंदिर का वर्णन स्कंद पुराण के केदार खंड में है।   मंदिर के बारे में दंत कथा-  मंदिर के पुजारी के अनुसार पौराणिक बिल्केश्वर महादेव मंदिर की बहुत मान्यता है. यहां गौरी कुंड में स्नान करने और बेलपत्र चढ़ाने मात्र से महादेव प्रसन्न होते हैं और भक्तों की हर मनोकामना पूरी करते हैं। शिवरात्रि   श्रावण मास में मंदिर मैं क्या विशेष - श्रावण मास में यहां भगवान शंकर का रुद्राभिषेक और अनुष्ठान किया जाता है।  मंदिर में अंदर जाने पर दर्शन -  बिल्केश्वर महादेव  के अंदर जाने के बाद  नंदी जी की बड़ी मूर्ति, गणेश जी की मूर्त...

गुरुदेव के प्रथम जन्म अखिल विश्व गायत्री परिवार

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अखिल विश्व गायत्री परिवार संस्थापक संरक्षक परम पूज्य गुरुदेव के प्रथम जन्म के कुछ दुर्लभ प्रसंग         (1398 - 1518 ई०) (1911-1990)              संत कबीर - संतकबीर को एक मुसलमान जुलाहे ने तालाब के किनारे परा हुआ पाया उन्हें कोई ब्राहमण कन्या अवैध संतान होने के कारण इस प्रकार छोर गई थी | वे संत तो आजीवन रहे पर गुजारे के लिए रोटी अपने पेत्रीक वैयवसाय से कमाते रहे | अपने बारे मे उन्हें लिखा है काशी का मे वाशी ब्राहमण नाम मेरा परबीना एक बार हर नाम विसारा पकरी जुलाहा भाई मेरा कोन बनेगा ताना |                                                    संतकबीर                                                    (1398 - 1518 ई०) कबीर के कार्य 1. कबीर ने हिंदू समा...

ताजमहल

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ताजमहल ताजमहल- सन्  निर्माण 1632 से 1653 ई आगरा, उत्तर प्रदेश राज्य, भारत में स्थित है। ताजमहल आगरा शहर के बाहरी इलाके में यमुना नदी के दक्षिणी तट पर बना हुआ है। ताजमहल मुग़ल शासन की सबसे प्रसिद्ध स्मारक है। सफ़ेद संगमरमर की यह कृति संसार भर में प्रसिद्ध है और पर्यटकों के आकर्षण का मुख्य केन्द्र है। ताजमहल विश्व के सात आश्चर्यों में से एक है। ताजमहल एक महान् शासक का अपनी प्रिय रानी के प्रति प्रेम का अद्भुत शाहकार है। ताजमहल का सबसे मनमोहक और सुंदर दृश्य पूर्णिमा की रात को दिखाई देता है। ताजमहल का इतिहास मुग़ल बादशाह शाहजहाँ ने ताजमहल को अपनी पत्नी अर्जुमंद बानो बेगम, जिन्हें मुमताज़ महल भी कहा जाता था, की याद में बनवाया था। ताजमहल को शाहजहाँ मुमताज़ महल की क़ब्र के ऊपर बनवाया था । मृत्यु के बाद शाहजहाँ को भी वहीं दफ़नाया गया। मुमताज़ महल के नाम पर ही इस मक़बरे का नाम ताजमहल पड़ा। सन् 1612 ई. में निकाह के बाद 1631 में प्रसूति के दौरान बुरहानपुर में मृत्यु होने तक अर्जुमंद शाहजहाँ की अभिन्न संगिनी बनी रहीं । मुमताज़ महल के रहने के लिए दिवंगत रानी के नाम पर मुमताज़ा बाद बनाया गया, जिसे ...

प्रगेश्वर महाकाल मंदिर देव संस्कृति विश्वविद्यालय परिसर हरिद्वार (उत्तराखंड)

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संध्याकालीन भव्य दर्शन प्रगेश्वर महाकाल -  देव संस्कृति विश्वविद्यालय उत्तराखंड हरिद्वार  प्रातः कालीन भव्य दर्शन प्रगेश्वर महाकाल -  यह हमारे देव संस्कृति विश्वविद्यालय उत्तराखंड हरिद्वार का मुख्य अंग है महाकाल विश्वविद्यालय के केंद्र में विराजमान है और यह विश्वविद्यालय का मुख्य आकर्षण केंद्र भी माना जाता है मुख्यमंत्री और प्रधानमंत्री जैसे लोग जब हमारे विश्वविद्यालय में आते हैं तो वह लोग भी पहले महाकाल प्रणाम में ही आते हैं उसके बाद ही आगे के कार्यक्रम की शुरुआत की जाती है महाकाल के लिए खास दिन माने जाने वाले दिन - शिवरात्रि के अवसर पर इस प्रांगण में एक भव्य समारोह होता है प्रगेश्वर महाकाल  की दैनिक दिनचर्या -  प्रतिदिन शाम 6:00 बजे से 6:15 तक महाकाल के प्रांगण में नाद योग होता है महाकाल आरती का समय  -सुबह करीब 6-6:30 बजे   संध्या आरती 5:00 बजे महाकाल दर्शन का समय -  सुबह 6:00 बजे  - रात्रि 7:30 बजे। महाकाल की स्थापना -   श्री प्रजेश्वर महादेवस्थापना :- संवत् २०५९ फाल्गुन कृष्ण चतुर्दशी (महाशिवरात्रि) शनिवार, तदनुसार ...

श्री राम स्मृति उपवन (देव संस्कृति विश्वविद्यालय परिषर: हरिद्वार (उत्तराखण्ड )

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                                                    श्री राम स्मृति उपवन श्री राम स्मृति उपवन इस उपवन की स्थापना - पूज्य गुरुदेव पंडित श्रीराम शर्मा आचार्य जी के जन्मशताब्दी के अवसर पर वृक्ष गंगा अभियान द्वारा सितंबर 2011 मैं परम आदरणीय श्रद्ध डॉक्टर प्रणव पण्ड्या जी द्वारा स्थापित किया गया था। इस उपवन को एक्यूप्रेशर पार्क के नाम से भी जाना जाता है। पवन की स्थापना का उद्देश्य -   इस उपवन की  स्थापना का उद्देश्य लोगों को स्वास्थ्य के प्रति जागरूक करना और प्रकृति में उपलब्ध वस्तुओं का महत्त्व समझा कर प्रकृति के प्रति एवं आयुर्वेद के प्रति जागरूक करना है। और दूसरे शब्दों में कहा जाये तो इस उपवन की स्थापना का भूल उद्देश्य है पर्यावरण में संतुलन लाना और लोगो को उसके प्रति जागरूक करना। उपवन में उपलब्ध सुविधाएँ - उपवन में कई प्रकार की सुविधाएं उपलब्ध है, जिस में कुछ प्रमुख सुविधाएं इस प्रकार है।        1. स्वास्थ्य सुविधा...

चंद्रयान महत्वपूर्ण जानकारी

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                                                                           चंद्रयान 1. पहला चंद्रयान 22 अक्टूबर 2008 को भेजा गया ! 2. दूसरा चंद्रयान 22 जुलाई 2019 को भेजा गया! 3. तीसरा चंद्रयान 14 जुलाई 2023 भेजा गया!                          चंद्रयान 3 से क्या-क्या मिला भारत को  1. भारत विश्व का पहला मुज़ाहिर, जो चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव पर उतरा  2. भारतचंद की सतह पर मुलायम उतरने वाला चौथा मुसाफ़िर बना  3. चंद्रयान 3 से भारतीय अंतरिक्ष संस्थान को मिलेगा बड़ा उछाल  5. अंतरिक्ष शक्ति के रूप में स्ट्रैटेजिक होगी भारत की साख  6. भावी भारतीय चंद्र मिशनों पर भी पड़ेगा असर 

चंद्रयान 3 कविता

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 चंद्रयान 3 कविता  चंद्र पर ! क्रांतिकारी लैंडिंग के साथ। भारत का हो पूर्ण विकास । चलो चले! आसमान के पास। तारो की आस। नई नई रचनात्मकता के पास। चंदा के टूर की आस।  इसे! विज्ञान और अध्यात्म ने किया  साथ तलाश। इसरो की मेहनत और लगन से चंदा  आएगा जल्द ही पास। चलो करे! जीवन और भौतिक खोज का वि कालांतर मे!पूर्ण होगी हर व्यक्ति की तलाश  मित्र ! क्रांतिकारी लैंडिंग के साथ। हो गई है,,,,,शुरुवात।चंद्र पर !

सिद्धेश्वर महाकाल देव संस्कृति विश्वविद्यालय हरिद्वार परिसर

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सिद्धेश्वर महाकाल  देव संस्कृति विश्वविद्यालय हरिद्वार  सिद्धेश्वर महाकाल का इतिहास सिद्धेश्वर महाकाल की स्थापना परम वंदनीय माता भगवती देवी शर्मा द्वारा किया गया जब विश्वविद्यालय बनाने हेतु जमीन की खरीदारी हुई थी उस समय विश्वविद्यालय परिसर में पूरा जंगल की तरह था जब कार्यकर्ता लोग वृक्ष की कटाई करते थे तो हर एक जगह से सांप निकलता था इस वजह से परम वंदनीय माता जी सिद्धेश्वर महाकाल की स्थापना करके महाकाल भगवान से या विनती किए की यहां के सारे सांप को अपने में समेट ले तब से इस विश्वविद्यालय परिसर में बहुत कम साफ दिखने लगे।  वर्तमान समय में सिद्धेश्वर महाकाल  सिद्धेश्वर महाकाल पर हम लोग सुबह-सुबह प्रत्येक दिन जल चढ़ाने जाते हैं जिससे हम सबको बहुत आनंद की अनुभूति होती है यहां पर विश्वविद्यालय में अध्ययनरत विद्यार्थी अपने जन्म दिवस के अवसर पर जन्म दिवस मनाने जाते हैं तथा सभी लोग उनके मित्र गण वहां पहुंचकर प्रज्ञा गीत गाते हैं साथ ही महाकाल के भजन गाते हैं इससे हम सबको आंतरिक उल्लास प्रसंता की अनुभूति होती है छोटे महाकाल पर हम सब नवरात्रि के अवसर पर यज्ञ करते हैं तथा यहां न...

नवयुग का अखंडदीप कविता

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                               नवयुग का अखंडदीप अखंड है वो दीप जिसने क्रांति की है मशाल जलाई | अखंड है वो दीप जिसने क्रांति की है मशाल जलाई || अखंड है वो दीप जिसने नवयुग की है गंगोत्री बहाई  | प्रेम के है वो दीप जिसने सतयुग को है दिशा बताई  || अखंड है वो दीप ............... ज्ञान के है वो दीप जिसने कलयुग को है संस्कृति बताई  | सद्भाव के है वो दीप जिसने सुविचारो की है क्रांति लाई  || अखंड है वो दीप ............... जल रहा है वो दीप जिसने ऋषि परम्परा को जिवंत बनाया  | चल पड़ा है करवा वो जिसने नवयुग में है अलोक जगाया  || अखंड है वो दीप ............... श्रीराम है सद्गुरु जिन्होने क्रांति की यह मशाल जलाई  | नवयुग की गंगोत्री बनकर सद्विचारो की गरिमा बताई  || ...

FOUNDER OF AWGP

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  गुरुदेव आचार्य जी का बचपन 1. आचार्य जी का बचपन गाँव मे ही बिता बचपन से ही उनका झुकाव अध्यात्म और साधना की ओर अधिक था | 2. आचार्य जी नर सेवा को ही नारायण सेवा मानते थे | वे जात - पात मे विशवास नहीं रखते थे | उन्होंने किशोराअवस्था मे ही समाज सुधारक की रचनात्मक प्रविर्तिया चलाना आरंभ कार दी थी | गुरुदेव एक महान स्वतंत्रता सेनानी परतंत्र भारत के प्रतंत्र होने की पीरा उन्हें बहुत सताती थी वर्ष 1927 – 1933 तक स्वतंत्रता संग्राम आंदोलन में अपने संक्रिय भुमिका का निर्वाहन किया | और वे कई बार जेल भी गए जेल मे भी अपने साथियों को शिक्षण दिया करते थे | और वे वहाँ से अंग्रजी सिखकार लौटे | गुरुदेव के गुरु श्री पंडित मदन मोहन मालवीय जी दादा गुरुदेव गुरु देव के प्रथम गुरु श्री पंडित मदन मोहन मालवीय जी - उनके प्रथम गुरु श्री पंडित मदन मोहन मालवीय जी ने उन्हें काशी में सर्वश्रेष्ट मंत्र कहे जाने वाले गायत्री मंत्र की शिक्षा दी | गुरुदेव के कार्य उद्देश्य गुरुदेव के कार्य उद्देश्य - उन्होंने आधुनिक...