सनातन संस्कृति की पूजा पद्धति का वैज्ञानिक प्रतिपादन
विज्ञान VS संस्कृति
सनातन संस्कृति की पूजा प्रणाली में
उपयुक्त होने वाली पद्धति का वैज्ञानिक महत्त्व निम्नलिखित है –
शंख – शंख का उपयोग करने से उसके ध्वनि के माध्यम से स्नायु तंत्र जागृत होते है अर्थात दिमाग की तंत्रिकाए
सक्रिय होती है |
तिलक – रोजाना चन्दन का उपयोग करके तिलक लगाने से आज्ञाचक्र जागृत होता है जिससे
लोगों में एकाग्रता और आत्मविश्वास जागृत होता हैं और बढ़ता है |
कलावा – विज्ञान के अनुसार हाथ में कलावा बंधने से निर्भयता आती है और रक्त संचार संतुलित
रखता है |
घंटी– इसका उपयोग करने से ध्वनी का
वयापक प्रभाव पढ़ता है और मन मस्तिक में चल रही बातों को आसानी से भूल जाते है और
हमारा मन शांत रहता है तथा भगवन में लीन हो जाता है और एकाग्रता बनी रहती हैं |
दीपक – दीपक को सकारात्मकता का प्रतिक
मानते हुए कहा गया हैं की इसका उपयोग करने से सकारात्मक ऊर्जा में वृद्धि होती है
|
तुलसी – तुलसी एक औषधीय पौधा है जो की 800 प्रकार बीमारियों का समूल नाश करता हैं और सकारात्मक
ऊर्जा में वृद्धि होती है
पीपल – पीपल को भी प्राणवायु का उचित श्रोत माना गया है | जो हमें जीवन प्रदान करती
है ,उसकी रक्षा करना परम कर्तव् हैं |

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