नवयुग का अखंडदीप कविता
नवयुग का अखंडदीप
अखंड है वो दीप जिसने क्रांति की है मशाल जलाई |
अखंड है वो दीप जिसने क्रांति की है मशाल जलाई ||
अखंड है वो दीप जिसने नवयुग की है गंगोत्री बहाई |
प्रेम के है वो दीप जिसने सतयुग को है दिशा बताई ||
अखंड है वो दीप...............
ज्ञान के है वो दीप जिसने कलयुग को है संस्कृति बताई |
सद्भाव के है वो दीप जिसने सुविचारो की है क्रांति लाई ||
अखंड है वो दीप...............
जल रहा है वो दीप जिसने ऋषि परम्परा को जिवंत बनाया |
चल पड़ा है करवा वो जिसने नवयुग में है अलोक जगाया ||
अखंड है वो दीप...............
श्रीराम है सद्गुरु जिन्होने क्रांति की यह मशाल जलाई |
नवयुग की गंगोत्री बनकर सद्विचारो की गरिमा बताई ||
अखंड है वो दीप...............
श्रीराम आप से ही आप पे ही जिन्दगी पूरी हमारी |
कर दूँ ये जीवन समर्पित गुरुमिशन के कार्यो के खातिर ||
अखंड है वो दीप...............


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