कुलगीत में छुपा देख संस्कृत विश्वविद्यालय का संपूर्ण रहस्य

॥ कुलगीत ॥


मानवी उत्थान
का जो अनवरत आधार है। 
देव संस्कृति विश्वविद्यालय सृजन का द्वार है ।।

गोद गंगा की, हिमालय की मिली छाया इसे,
  दिव्य वातावरण में पोषित मिली काया इसे ।। 
कुलपिता का बरसता स्नेह संरक्षण यहाँ ।
 कर्म की मिलती उन्हीं से प्रेरणा हर क्षण यहाँ ।।
कुल जननी की दिव्य मृदु ममतामयी रसधार है ।
देव संस्कृति विश्वविद्यालय, सृजन का द्वार है ।। १।।

यह प्रखर युव-शक्ति के मार्गान्तरण का हेतु है।
 सभ्यता-संस्कृति - समन्वय का सुमंगल सेतु है ।। 
संतुलन होता यहाँ यूँ आचरण सुविचार में, ताकि वह तृण-सा न बह पाए समय की धार में 
।। प्राणबल का इस तरह होता यहाँ संचार है।
 देव संस्कृति विश्वविद्यालय, सृजन का द्वार है ।। २।।

है यहाँ होता प्रखरतम चेतना का जागरण,
 आपसी सदभावना, संवेदना का जागरण ।। 
यह महामानव बनाने की सुगढ़ टकसाल है, 
वास कर इसमें युवाओं की बदलती चाल है।।
 विश्व फिर लगता उन्हें अपना सगा परिवार है
। देव संस्कृति विश्वविद्यालय, सृजन का द्वार है ॥ ३॥

DEV SANSKRITI

VISHWAVIDYALAYA

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