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गायत्री के बारे में महापुरुषों के कथन

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गायत्री के बारे में महापुरुषों   के   कथन भगवान मनु - जो मनुष्य निरंतर रुप से 3 वर्ष तक गायत्री जब करता है वे ईश्वर को   प्राप्त   करता   है | अत्री मुनि - गायत्री आत्मा का परम शोधन करने वाली है उसके प्रताप से कठिन दोष और दुर्ग का परिमार्जन   हो   जाता   है | पराशर ऋषि - भक्ति पूर्व गायत्री का जब करने वाला मुक्त होकर पवित्र   बन   जाता   है | दयानंद ऋषि - जो जिज्ञासु गायत्री मंत्र का प्रेम और नियम पूर्वक आचरण करता है उनके लिए यह संसार सागर से चलने के नौ एवं आत्म प्राप्ति   की   सड़क   है | शौनक ऋषि - अन्य उपासना करे या ना करे केवल गायत्री जब से ही   द्विज मुक्त   हो   जाता   है | भारद्वाज ऋषि - अनुचित कार्य करने वाले के दुर्ग गायत्री के कारण   छूट   जाते   हैं | नारद जी - गायत्री भक्ति का ही स्वरुप है जहां भक्ति रुपी गायत्री है वहां श्री नारायण का निवास होने में   कोई   संदेह   नहीं | चरक ऋषि - जो बड़ा मचाले पूर्वक गायत्री की उपासना ...

महापुरुषों के दृष्टि में गुरुदेव

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  महापुरुषों के दृष्टि में गुरुदेव देवराहा बाबा - देवराहा बाबा एक सिद्ध पुरुष थे उन्होंने कहा यह समझो कि मैं हृदय से सतत उनका मन करता हूं गायत्री उनमें पूर्णता समा गई है एवं वेश अच्छा   सविता   स्वरुप   है | करपात्री जी महाराज - आचार्य जी इस युग में गायत्री के जनक है उन्होंने गायत्री को सबकी बना दिया यदि इसे मात्र ब्राह्मणों की मानकर उन्हीं के भरोसे छोड़ दिया होता तो अब तक गायत्री महाविद्या संभवता लुप्त   हो   गई   होती | डॉ शंकर दयाल शर्मा - यह हमारे भारत देश के पूर्व राष्ट्रपति थे उन्होंने कहा कि अच्छा दूसरी ने सिद्ध था और साधना को आधुनिक युग के अनुकूल तक एवं सब देकर सामाजिक परिवर्तन का जो मार्ग दिखाया है उनके लिए आने वाली पीढ़ी युग युग   तक   कृतज्ञ   रहेगी | महात्मा आनंद स्वामी अच्छा जी सेन डाइट को जन जन की बनाकर महर्षि दयानंद के कार्य को आगे बताया है गायत्री और ये एक   रुप   हो   गए   हैं | डॉ राधा कृष्ण - उन्होंने उनके द्वारा लिखी गई पुस्तक   के बाद कहा कि काश यह पुस्तक के हमें जवानी में म...

पूज्य गुरुदेव श्री राम शर्मा आचार्य जी

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  समृद्ध और सांस्कृतिक भारत का दर्शन अध्यात्म  आनंद   के   साथ `शांतिकुंज अ अध्यात्म  और विज्ञान का समन्वय विचारों   का   आधार युग की जरूरत एवं आवश्यकताओं के साथ संपूर्ण तीर्थ परंपरा पर आधारित | D.S.V.V स अध्यात्म  सांस्कृतिक भारत का दर्शन अध्यात्म के आनंद के साथ ऋषि परंपरा और समाज कल्याण की झलक गुरुकुल   परंपरा   के   संघ | ब्रह्मा   वर्चस्व अ अध्यात्म  के साथ विज्ञान का समन्वय और शोधों की झलक आयुर्वेद के संघ  | जन्मभूमि ज   जन्म  के साथ संस्कारों के संग बढ़ते कदम अद्भुत परिवर्तन के सपनों के   संघ | अखंड   ज्योति   संस्थान   वि     विचार क्रांति अभियान और युग आवश्यकताओं के संग विस्तृत ज्ञान गंगा का आलोक केंद्र | तपोभूमि दि   दिव्या वातावरण  मे    विकसित  होते साधना और मनोबल तपोवल   के साथ विकसित होते योग निर्माण के   दिव्या   संकल्प |