सिद्धेश्वर महाकाल देव संस्कृति विश्वविद्यालय हरिद्वार परिसर

सिद्धेश्वर महाकाल  देव संस्कृति विश्वविद्यालय हरिद्वार 




सिद्धेश्वर महाकाल का इतिहास


सिद्धेश्वर महाकाल की स्थापना परम वंदनीय माता भगवती देवी शर्मा द्वारा किया गया जब विश्वविद्यालय बनाने हेतु जमीन की खरीदारी हुई थी उस समय विश्वविद्यालय परिसर में पूरा जंगल की तरह था जब कार्यकर्ता लोग वृक्ष की कटाई करते थे तो हर एक जगह से सांप निकलता था इस वजह से परम वंदनीय माता जी सिद्धेश्वर महाकाल की स्थापना करके महाकाल भगवान से या विनती किए की यहां के सारे सांप को अपने में समेट ले तब से इस विश्वविद्यालय परिसर में बहुत कम साफ दिखने लगे। 

वर्तमान समय में सिद्धेश्वर महाकाल 

सिद्धेश्वर महाकाल पर हम लोग सुबह-सुबह प्रत्येक दिन जल चढ़ाने जाते हैं जिससे हम सबको बहुत आनंद की अनुभूति होती है यहां पर विश्वविद्यालय में अध्ययनरत विद्यार्थी अपने जन्म दिवस के अवसर पर जन्म दिवस मनाने जाते हैं तथा सभी लोग उनके मित्र गण वहां पहुंचकर प्रज्ञा गीत गाते हैं साथ ही महाकाल के भजन गाते हैं इससे हम सबको आंतरिक उल्लास प्रसंता की अनुभूति होती है छोटे महाकाल पर हम सब नवरात्रि के अवसर पर यज्ञ करते हैं तथा यहां नवमी के दिन नौ कन्या को यहां भोजन कराया जाता है तथा उसके बाद हम सब मिलकर प्रसाद खाते हैं|


 सिद्धेश्वर महाकाल स्वरूप 

सिद्धेश्वर महाकाल के दरवाजे पर एक घंटा लगा हुआ है तथा अंदर जाने पर महाकाल के सामने नंदी का मूर्ति है तथा उसके बगल में एक कच्छप का मूर्ति है। महाकाल का मंदिर के ऊपर श्वेत रंग का एक ध्वज एक त्रिशूल लगा हुआ है महाकाल के चारों तरफ हरे भरे फूल के पौधे तुलसी के तथा आम के वृक्ष लगे हुए हैं।

 
विश्वविद्यालय के बच्चों के लिए विशेष व्यवस्था - इसके अंतर्गत महाकाल में एक विशेष व्यवस्था विश्वविद्यालय के बच्चों के लिए प्रशासन द्वारा निशुल्क की जाती है यदि किसी का जन्मदिन या परिजन  के लिए कोई विशेष दिन होता है तो विश्वविद्यालय द्वारा बच्चों के आगरा पर संध्याकालीन दिव्या के निशुल्क व्यवस्था कराई जाती है इसमें बच्चे अपने सहपाठियों और मित्रों के साथ एक यादगार पल के रूप में उसे दिन को सेलिब्रेट करते हैं और घर से दूर रहकर भी महाकाल के इस घोसले में अपने खास दिन को एक यादगार और ऐतिहासिक पल में बदलते हैं | 



इसी के अंतर्गत पुराने बच्चों द्वारा हमारे आगरा पर साझा किए गए कुछ यादगार पल




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