गुरुदेव के प्रथम जन्म अखिल विश्व गायत्री परिवार


अखिल विश्व गायत्री परिवार संस्थापक संरक्षक परम पूज्य गुरुदेव के प्रथम जन्म के कुछ दुर्लभ प्रसंग

        (1398 - 1518ई०)


(1911-1990)
          
 संत कबीर - संतकबीर को एक मुसलमान जुलाहे ने तालाब के किनारे परा हुआ पाया उन्हें कोई ब्राहमण कन्या अवैध संतान होने के कारण इस प्रकार छोर गई थी |


वे संत तो आजीवन रहे पर गुजारे के लिए रोटी अपने पेत्रीक वैयवसाय से कमाते रहे |

अपने बारे मे उन्हें लिखा है काशी का मे वाशी ब्राहमण नाम मेरा परबीना एक बार हर नाम विसारा पकरी जुलाहा भाई मेरा कोन बनेगा ताना |




                                                  संतकबीर 

                                                  (1398 - 1518ई०)

कबीर के कार्य

1. कबीर ने हिंदू समाज की कुरीतियां और मत माता अंतर के विग्रह विडंबनाओ को दूर करने के लिए प्राणवाल से प्रयत्न किया

 इस कारण उन पर इस्लाम विरोधी होने का इंजाम  लगाया गया और इसके दंड स्वरूप उनके हाथ पैर में लोहे की जंजीर बांधकर नदी में डलवा दिया गया पर ईश्वर कृपा से जंजीर टूट गया और वह जीवित बच गए पर कल और वंश को लेकर उन्हें समाज का विग्रह सहना पड़ा वो एका की अपने प्रतिबंधों पर पड़े रहे

कबीर के मृत्यु की कहानी - उन दिनों काशी में मृत्यु से स्वर्ग मिलने और मगहर में मरने  पर नरक जाने की मान्यता प्रचलित थी वह इसका खंडन करने के लिए अपने आखिरी दिनों में मगहर चले गए और वही अपना शरीर त्याग किया |

कबीर विवाहित थे उनके पत्नी का नाम लुई था वह आजीवन उनके हर काम में उनके साथ रही उन्होंने एक दिन भी ऐसा न जाने दिया जिसमें भ्रांतियां के निवारण और संत परंपराओं के प्रतिपादन मैं प्राणवाल से प्रयत्न  ना किया हो

कबीर की खासियत विरोधियों में से कोई भी उनको तनिक न झुका सका

कबीर के मृत्यु  मरते समय उनके लाश को मुसलमान दफना चाहते थे और हिंदू जालना 

कबीर ने मरते समय भी किया अद्भुत चमत्कार - जब उनके लाश के लिए हिंदू मुसलमान आपस में लड़ रहे थे तो चमत्कार यह हुआ कि कफन के भीतर से लास्ट लुप्त हो गया और उसके स्थान पर फूल पड़ा मीला इनमें से आधे को मुसलमान ने दफनाया और आधे को हिंदुओं ने जलाया दोनों ही संप्रदाय वालों ने उनकी स्मृति  में भव्य भवन बनाया |




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