कविता G20
कविता नव युग का यह संविधान । ईसी पर हैं सम पूर्ण दारोमदार ।। इसी से होगा युग निर्माण। इसी से है यह क्रांतिकारी आस।। नव युग का यह संविधान। वसुधैव है इसकी खास ।। पूरे विश्व की एक मात्र आस । उपासना से है आस। साधना में है विश्वासl। आराधना से है आधार। विश्व की अब यही पुकार।। नव युग का है संविधान। इसी पर है अब विश्व की आस।। नव युग का यह संविधान । विचार क्रांति का है यह सूत्रधार।। नव युग का यह संविधान। इसी से होगा युग निर्माण।। यही है अब जीवन आधर। विचारों का हो परिष्कार ।। नव युग का यह संविधान। इसी से होगा युग निर्माण।। नव युग का यह संविधान।। इसी से है अब एक मात्र आस। धरती का हो पुनरुत्थान।। मनुष्य को है विवेक की आस । बुद्धि का हो परिष्कार ।। ईसी से होगा अब युग निर्माण। यही है विश्व का संपूर्ण आधार।। नव युग का यह संविधान। लेकर वसुधैव कुटुंबकम हो विश्वा पास।। यही है अब विश्वास कि आस। नव य...