महापुरुषों के दृष्टि में गुरुदेव
महापुरुषों के दृष्टि में गुरुदेव
देवराहा बाबा - देवराहा बाबा एक सिद्ध पुरुष थे
उन्होंने कहा यह समझो कि मैं हृदय से सतत उनका मन करता हूं गायत्री उनमें पूर्णता
समा गई है एवं वेश अच्छा सविता स्वरुप है|
करपात्री जी महाराज - आचार्य
जी इस युग में गायत्री के जनक है उन्होंने गायत्री को सबकी बना दिया यदि इसे मात्र
ब्राह्मणों की मानकर उन्हीं के भरोसे छोड़ दिया होता तो अब तक गायत्री महाविद्या
संभवता लुप्त हो गई होती |
डॉ शंकर दयाल शर्मा - यह हमारे भारत देश के पूर्व
राष्ट्रपति थे उन्होंने कहा कि अच्छा दूसरी ने सिद्ध था और साधना को आधुनिक युग के
अनुकूल तक एवं सब देकर सामाजिक परिवर्तन का जो मार्ग दिखाया है उनके लिए आने वाली
पीढ़ी युग युग तक कृतज्ञ रहेगी |
महात्मा आनंद स्वामी अच्छा जी सेन डाइट को जन
जन की बनाकर महर्षि दयानंद के कार्य को आगे बताया है गायत्री और ये एक रुप हो गए हैं |
डॉ राधा कृष्ण - उन्होंने उनके द्वारा लिखी गई
पुस्तक के बाद कहा कि काश यह पुस्तक के
हमें जवानी में मिल गई होती मेरी जीवन की दिशा धारा कुछ और ही होती मैं राजनीति
में नाजा का आचार सही के चरणों में बैठकर अध्यात्म का ज्ञान ले रहा होता |
श्री नानाजी देशमुख - आचार्य श्री राम शर्मा जी ने जो कार्य कर दिखाया वह अद्भुत है के लिए नितांत आवश्यक है चार्जर जी के साहित से मैं बहुत प्रभावित हूं प्रज्ञा अभियान ने विशेष रुप से मुझे अपने कार्य में बहुत बल प्रदान किया है उनका चिंतन राष्ट्र को शक्तिशाली बनाता और मानव मात्र को शक्ति और निरंतर सही दिशा प्रदान करता है |
आचार्य विनोबा भावे - उन्होंने गुरुदेव द्वारा किए गए भाष्य
को ग्वालियर में अपने सिर पर धर्म करते हुए कहा कि यह ग्रंथ किसी व्यक्ति द्वारा
नहीं बल्कि एक महा अवतार और एक महान निर्देश पर एक विशेष शक्ति द्वारा लिखी गई है |
डॉ ए पी जे अब्दुल कलाम - पूर्व राष्ट्रपति
एक वैज्ञानिक आचार जीने सपनों को साकार रुप दिया है उन्हें भारत के ज्ञान क्रांति
का प्रवर्तक कहना उपयुक्त होगा अचार श्री का विचार था कि अज्ञानता ही इशारे दुखों
की जननी है और एक महत्वपूर्ण कारण तथा अज्ञानता और गरीबी का जब भी है |
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