गायत्री के बारे में महापुरुषों के कथन
गायत्री के बारे में महापुरुषों के कथन
भगवान मनु - जो मनुष्य निरंतर रुप से 3 वर्ष
तक गायत्री जब करता है वे ईश्वर को प्राप्त करता है |
अत्री मुनि - गायत्री आत्मा का परम शोधन करने वाली है उसके
प्रताप से कठिन दोष और दुर्ग का परिमार्जन हो जाता है |
पराशर ऋषि - भक्ति पूर्व गायत्री का जब करने वाला
मुक्त होकर पवित्र बन जाता है |
दयानंद ऋषि - जो जिज्ञासु गायत्री मंत्र का प्रेम और नियम
पूर्वक आचरण करता है उनके लिए यह संसार सागर से चलने के नौ एवं आत्म प्राप्ति की सड़क है |
शौनक ऋषि - अन्य उपासना करे या ना करे केवल गायत्री जब से
ही द्विज मुक्त हो जाता है |
भारद्वाज ऋषि - अनुचित कार्य करने वाले के दुर्ग
गायत्री के कारण छूट जाते हैं|
नारद जी - गायत्री भक्ति का ही स्वरुप है जहां
भक्ति रुपी गायत्री है वहां श्री नारायण का निवास होने में कोई संदेह नहीं |
चरक ऋषि - जो
बड़ा मचाले पूर्वक गायत्री की उपासना करता है और आमले के ताजे फल का सेवन करता है
वह दीर्घ जीवी होता है |
महर्षि व्यास - गंगा शरीर के पापों को निर्मल करती है
और गायत्री रुपी ब्रह्म गंगा से आत्मा पवित्र होता है|
यज्ञवल्क ऋषि - गंगा के समान कोई तीर्थ नहीं के सबसे
श्रेष्ठ कोई देव नहीं और गायत्री से श्रेष्ठ मंत्र न हुआ न आगे होगा |

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